सामान्य से कम हुई जून में बारिश, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

Weather: Rainfall in Mumbai
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  • 173.9 मिमी सामान्य बारिश होनी चाहिए जून में
  • 152.3 मिमी ही हुई 30 जून तक जिले में
  • 21.6 मिमी कम बरसे बादल

इस वर्ष 1 जून से 30 जून तक पूरे विदर्भ में सामान्य से काफी कम बारिश हुई. नागपुर जिले में भी ऐसा ही हाल है जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं. जिले के आसमान में तो बादल जम ही नहीं पा रहे हैं. टुकड़ों में बारिश हो रही है. ग्रामीण भागों में किसानों के खेतों को बुआई और बुआई के बाद के लिए जितनी पानी की जरूरत है वह नहीं मिल पाया है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है उन पर तो दोबारा बुआई की नौबत आने का खतरा पैदा हो गया है.

जून के महीने में जिले में जहां सामान्य वर्षा 173.9 मिमी होनी चाहिए वह 30 जून तक 152.3 मिमी ही हुई. औसत से 21.6 मिमी बारिश कम हुई. कुछ किसानों ने बताया कि सोयाबीन, तुअर के अंकुर निकले हैं लेकिन और बारिश की जरूरत है. जल्द ही पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो दोबारा बुआई की नौबत आ सकती है. कपास का भी ऐसा ही हाल है. बीते वर्ष 2022 जून में भी मात्र 124.8 मिमी बारिश हुई थी. 

कपास, सोयाबीन के रोप को खतरा

कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई थी 75 से 100 मिमी बारिश होने पर ही फसलों की बुआई करें. जिले के अधिकतर किसानों ने वैसा ही किया लेकिन बादल अब दगा दे रहे हैं. कपास और सोयाबीन के तो रोप करीब 6 इंच तक के हो गए हैं लेकिन बारिश नहीं होने से गर्मी व उमस में उनके खराब होने का खतरा पैदा हो गया है.

मौसम विभाग द्वारा रोज ही बारिश की संभावना व्यक्त की जा रही है लेकिन बादल टुकड़ों में बरस रहे हैं. शहर में ही बीते 3 दिनों से टुकड़ों में बौछारें ही पड़ रही हैं. जिले का भी ऐसा ही हाल है. केवल बौछारें ही पड़ रही हैं. बादल जम ही नहीं पा रहे हैं. कहा जा रहा है कि अगर 3-4 दिनों में अच्छी बारिश हो गई तो फसल को खतरा नहीं होगा. धान उत्पादक किसानों को तो समझ ही नहीं आ रहा है कि कब भरपूर पानी खेतों में जमा होगा और बुआई-रोपाई की जा सकेगी. 

2 वर्ष मेहरबान हुए थे बादल

बीते वर्ष भी जून में बादलों ने दगा दिया था लेकिन उसके पहले 2 वर्ष जून के महीने में जिले में सामान्य से अधिक बारिश हुई थी. वर्ष 2021 में जून के महीने में 197.0 मिमी बारिश हुई थी तो उसके पहले 2020 में 277.0 मिमी बारिश जून के महीने में हुई थी. हालांकि इस वर्ष सामान्य से भी कम बारिश हुई. इसी तरह का हाल वर्ष 2019 में हुआ था जब किसानों की फसलें कम बारिश होने से खराब हुई थीं. उस वर्ष जून के महीने में मात्र 72.6 मिमी बारिश ही हुई थी और सूखा अकाल की स्थिति बन गई थी. 

8 वर्ष पूर्व रिकॉर्डतोड़

जिले में हर वर्ष मानसून का मूड अलग-अलग रहा है. 8 वर्ष पूर्व 2015 में अकेले जून के महीने में ही 447.1 मिमी की रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई थी. उसके ठीक एक वर्ष पूर्व 2014 जून में मात्र 72.4 मिमी बारिश हुई थी. किसी वर्ष सूखे की स्थिति तो किसी वर्ष अतिवृष्टि जिले के किसानों की कमर तोड़ती रही है. वर्ष 2013 में भी जून के महीने में 457.3 मिमी बारिश हुई थी. इस वर्ष अभी भी जल्द ही फसलों के लायक बारिश नहीं हुई तो जिले ही नहीं विदर्भ के किसान मुसीबत में आ जाएंगे. खासकर धान उत्पादक जिलों गोंदिया, भंडारा और गड़चिरोली में तो भरपूर पानी की जरूरत होती है. अब तक इन 3 जिलों में भी बारिश सामान्य से काफी कम हुई है. 

किस वर्ष कितनी बारिश (जून में)

वर्ष बारिश (मिमी)

2022 124.8

2021 197.0 

2020 277.0

2019 72.6

2018 293.5

2017 216.4

2016 176.6

2015 447.1

2014 72.4

2013 457.3

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